सोमवार 9 फ़रवरी 2026 - 08:57
नजफ़ अशरफ मेज़बानी को तैय्यार;हौज़ा के हज़ार साल की शुरुआत “शेख़ तूसी की विरासत” कॉन्फ़्रेंस

हौज़ा / नजफ़ ए अशरफ़ अपनी हौज़ा ए इल्मिया के हज़ार साल पूरे होने के सिलसिले में पहले इल्मी इवेंट की मेज़बानी करने जा रहा है।शेख़ तूसी की इल्मी विरासत” के उनवान से यह कॉन्फ़्रेंस दो दिनों तक चलेगी, जिसमें उस्तादों और रिसर्चरों की शिरकत से इस अज़ीम आलिम के इस्लामी और मग़रिबी फ़िक्र पर असर के नए सिरे से जायज़ा लिया जाएगा।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , नजफ़ ए अशरफ़ की हौज़ा-ए-इल्मिया के हज़ार साल की मुनासबत से होने वाली पहली मुक़द्दमाती इल्मी कॉन्फ़्रेंस “इस्लामी और मग़रिबी फ़िक्र के दायरे में शैख़ तूसी की इल्मी विरासत; मुआसिर तअस्सुरात और नज़रियात” के उनवान से आस्ताना-ए-मुक़द्दस हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम की मेज़बानी में आयोजित की जा रही है।

यह इल्मी इवेंट “हौज़ा-ए-नजफ़-ए-अशरफ हज़ार साल क़ुर्बानी और ख़िदमत” के शिआर के तहत, इस्लामी और मग़रिबी फ़िक्र में शेख़ तूसी की विरासत; मुआसिर रुख़” के मरकज़ी मौज़ू पर 11 और 12 फ़रवरी 2026 (22 और 23 बहमन 1404) को नजफ़-ए-अशरफ़ में मुनक़िद होगी।

मुनज़्ज़िमीन के मुताबिक़, यह कॉन्फ़्रेंस नजफ़ की हौज़ा की इल्मी विरासत को ज़िंदा करने के लिए तैयार किए गए वसीअ प्रोग्राम्स की एक कड़ी है। इसका मक़सद शेख़ तूसी के तारीख़ी और तमद्दुनी किरदार की दोबारा पढ़त और इस्लामी फ़िक्र की तशकील में उनकी अहमियत को उजागर करना है, साथ ही आलम ए इस्लाम और मग़रिब में मुआसिर मुतालआत पर उनके असर की वज़ाहत करना भी है।

कॉन्फ़्रेंस में हौज़ा और यूनिवर्सिटी के नामवर उस्ताद और रिसर्चर अपने तख़्सीसी मक़ालात पेश करेंगे, जिनमें शेंख़ तूसी की इल्मी कामयाबियों, और फ़िक़्ह, उसूल, कलाम और तक़ाबुली मुतालआत की तरक़्क़ी में उनके मक़ाम का तजज़िया किया जाएगा।

मुनज़्ज़िमीन ने ज़ोर देकर कहा कि यह इवेंट उन इल्मी और सक़ाफ़ती प्रोग्राम्स की इब्तिदा है, जिन्हें आने वाले सालों में हौज़ा-ए-इल्मिया नजफ़-ए-अशरफ़ के हज़ार साल की मुनासबत से तर्तीब दिया गया है।

नजफ़ अशरफ मेज़बानी को तैय्यार;हौज़ा के हज़ार साल की शुरुआत “शेख़ तूसी की विरासत” कॉन्फ़्रेंस

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